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The Reality Check

CBSE OSM Controversy 2026

पूरी कहानी — सरल भाषा में | अपडेटेड: जून 2026 परिचय — एक “बड़ा सुधार” जो बड़ी आपदा बन गया CBSE यानी Central Board of Secondary Education ने 2026 में एक नया सिस्टम लागू किया जिसका नाम था OSM — On-Screen Marking। बोर्ड ने इसे एक ऐतिहासिक बदलाव बताया। कहा गया कि अब Class 12 […]

By @mritxperts June 6, 2026 Updated June 6, 2026 2 min read

पूरी कहानी — सरल भाषा में | अपडेटेड: जून 2026


परिचय — एक “बड़ा सुधार” जो बड़ी आपदा बन गया

CBSE यानी Central Board of Secondary Education ने 2026 में एक नया सिस्टम लागू किया जिसका नाम था OSM — On-Screen Marking। बोर्ड ने इसे एक ऐतिहासिक बदलाव बताया। कहा गया कि अब Class 12 की उत्तरपुस्तिकाएं डिजिटल तरीके से जांची जाएंगी — कोई गलत जोड़ नहीं, कोई उत्तरपुस्तिका खोएगी नहीं, जांच जल्दी होगी। सुनने में बहुत अच्छा लगा।

लेकिन जब 13 मई 2026 को Class 12 के परिणाम आए, तो पूरे देश में हाहाकार मच गया।

लाखों बच्चों को ऐसे नंबर मिले जो उनकी मेहनत और तैयारी से बिल्कुल मेल नहीं खाते थे। कुछ बच्चों को दूसरे बच्चों की उत्तरपुस्तिकाएं दिखाई गईं। कई उत्तरपुस्तिकाओं के पन्ने धुंधले या अपठनीय थे। कुछ पन्ने गायब थे। पोर्टल क्रैश हो गया। और इन सबके बीच — देश का पास प्रतिशत सात सालों में सबसे कम — 85.20% — रह गया।

यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं थी। यह उन 17 लाख से ज्यादा बच्चों के सपनों पर चोट थी जिनके Class 12 के नंबर उनके कॉलेज, करियर और जीवन की दिशा तय करते हैं।


OSM सिस्टम क्या है? — आसान भाषा में

OSM यानी On-Screen Marking एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें होता यह है:

  1. बच्चा परीक्षा दे देता है।
  2. उसकी उत्तरपुस्तिका एक स्कैनिंग सेंटर पर स्कैन की जाती है।
  3. स्कैन की गई उत्तरपुस्तिका एक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड होती है।
  4. शिक्षक अपने स्कूल में बैठकर उस उत्तरपुस्तिका को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते हैं और नंबर देते हैं।
  5. नंबर अपने आप जुड़ जाते हैं — हाथ से जोड़ने की जरूरत नहीं।

CBSE ने इसके 10 फायदे गिनाए थे:

  • हाथ से जोड़ने में होने वाली गलतियां खत्म होंगी
  • शिक्षकों को मूल्यांकन केंद्र तक जाना नहीं पड़ेगा
  • परिणाम जल्दी आएगा
  • परिणाम के बाद “वेरिफिकेशन” की जरूरत नहीं रहेगी
  • पर्यावरण के लिए भी अच्छा है

सुनने में यह सब बेहद शानदार था। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली।


टेंडर की कहानी — गड़बड़ी की जड़

पूरे विवाद की शुरुआत यहीं से होती है — कंपनी का चुनाव।

CBSE ने OSM सिस्टम चलाने के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिया। यह कंपनी थी Coempt Edu Teck (पहले इसका नाम Globarena Technologies था), जो हैदराबाद की है।

टेंडर प्रक्रिया में क्या हुआ?

  • Coempt को यह ठेका तीसरी बार में मिला — पहले दो बार वह क्वालीफाई नहीं कर पाई थी।
  • तीसरे टेंडर में नियम बदले गए — और बदलाव ऐसे थे जो Coempt के ठीक अनुकूल थे।
  • Coempt ने लगभग ₹24.75 प्रति उत्तरपुस्तिका का कोटेशन दिया, जबकि TCS जैसी दिग्गज कंपनी ने ₹65-66 प्रति उत्तरपुस्तिका (टैक्स से पहले) का कोटेशन दिया था।
  • Rankguru Technology Services, जिसका तीन साल का औसत टर्नओवर ₹117.56 करोड़ था, को हटा दिया गया।
  • पुराने नियमों के अनुसार बोली लगाने वाले का न्यूनतम टर्नओवर तीन साल में ₹50 करोड़ होना चाहिए था — नए नियम बिल्कुल उसी स्तर पर रखे गए जहां Coempt मुश्किल से पहुंच सके।
  • एक student activist Sarthak ने आरोप लगाया कि CBSE ने financial baselines घटाई, software security certifications की शर्तें ढीली कीं, और बोली से ठीक पहले एक corrigendum निकाल कर ‘blacklisting’ शब्द भी penalty matrix से हटा दिया।

Coempt का ट्रैक रिकॉर्ड क्या था?

यह सबसे चौंकाने वाली बात है — इसी कंपनी ने इससे पहले तेलंगाना में दो बार परीक्षा प्रणाली को बर्बाद किया था — 2019 में और 2023 में।

फिर भी इसे देश के लाखों बच्चों की उत्तरपुस्तिकाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई।


परिणाम के बाद क्या हुआ? — समस्याओं की फेहरिस्त

13 मई 2026 को जब परिणाम आए, तो शिकायतों का सैलाब आ गया:

1. धुंधली और अपठनीय उत्तरपुस्तिकाएं

कई उत्तरपुस्तिकाएं इतनी धुंधली स्कैन हुईं कि शिक्षक ठीक से पढ़ ही नहीं पाए। बच्चे ने लिखा भी हो, तो नंबर नहीं मिले — क्योंकि शिक्षक को दिखा ही नहीं।

2. गलत उत्तरपुस्तिकाएं

कुछ बच्चों को जांचने के लिए किसी और बच्चे की उत्तरपुस्तिका भेज दी गई। यानी एक बच्चे की मेहनत, दूसरे के नाम पर जांची गई।

3. गायब पन्ने

कई उत्तरपुस्तिकाओं के कुछ पन्ने पोर्टल पर अपलोड ही नहीं हुए — लेकिन शिक्षकों को पता ही नहीं चला।

4. पोर्टल क्रैश

मूल्यांकन के दौरान और बाद में पोर्टल बार-बार क्रैश हुआ। शिक्षकों को भारी दिक्कत हुई।

5. नंबर देखने पर रोक

CBSE ने OSM के साथ एक और बदलाव किया था — परिणाम के बाद marks verification बंद। यानी अगर बच्चे को कम नंबर मिले, तो वह पूछ भी नहीं सकता था।

6. Cybersecurity खतरा

19 साल के cybersecurity researcher Nisarga Adhikary ने OSM पोर्टल में गंभीर सुरक्षा खामियां ढूंढीं। उन्होंने फरवरी 2026 में ही CERT-In को इसकी सूचना दी थी। मई तक अधिकतर खामियां ठीक नहीं की गई थीं। उन्होंने बताया कि इन खामियों से किसी परीक्षक के account में बिना अनुमति प्रवेश किया जा सकता था और नंबर बदले जा सकते थे।


पास प्रतिशत में गिरावट — संख्याएं बोलती हैं

वर्षCBSE Class 12 Pass %
202387.33%
202488.48%
202588.39%
202685.20%

2026 का 85.20% पिछले सात वर्षों में सबसे कम था।

हर एक प्रतिशत की गिरावट के पीछे हजारों बच्चे हैं — जिनके कॉलेज दाखिले, स्कॉलरशिप और सपने दांव पर लगे थे।


शिक्षकों ने पहले ही चेताया था

यह बात भी सामने आई कि शिक्षक पहले से ही इस सिस्टम को लेकर चिंतित थे।

दिल्ली गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (GSTA) ने फरवरी 2026 में ही CBSE को पत्र लिखकर कहा था कि OSM को फिलहाल रोका जाए। उनकी दलील थी:

“डिजिटलीकरण एक प्रगतिशील कदम है, लेकिन पर्याप्त तैयारी और प्रशिक्षण के बिना इसे लागू करना गंभीर व्यावहारिक चुनौतियां पैदा करेगा।”

अधिकांश शिक्षकों को OSM के लिए कोई structured और certified training नहीं दी गई थी।

CBSE ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया और सिस्टम लागू करता रहा।


CBSE और सरकार की प्रतिक्रिया — देरी से टूटी चुप्पी

जब विवाद बहुत बड़ा हो गया, तब CBSE ने अपना पहला विस्तृत बयान जारी किया:

“हम अपने service provider के OnMark portal में उन vulnerabilities की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं जो public domain में सामने आई हैं।”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि OSM के पहले बड़े इस्तेमाल में कमियां सामने आई हैं। उन्होंने IIT और सरकारी agencies के cybersecurity विशेषज्ञों की एक टीम CBSE की मदद के लिए लगाई।

CBSE ने यह भी कहा:

  • Coempt पर contract के अनुसार financial penalty लगाई जाएगी।
  • छात्रों की mismatched answer sheet की समस्या को “top priority” पर लिया जाएगा।
  • Ethical hackers और researchers को खामियां directly CBSE की security team को report करने के लिए कहा गया।

अदालत तक पहुंचा मामला

NSUI की PIL दिल्ली हाई कोर्ट में

National Students’ Union of India (NSUI) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक PIL दायर की। इसमें मांग की गई:

  • OSM system में हुई “large scale irregularities” की स्वतंत्र जांच हो।
  • लाखों प्रभावित छात्रों को न्याय मिले।

PIL में कहा गया कि परिणाम आने के बाद blurred scans, missing pages, mismatched answer sheets और unexpectedly low marks की शिकायतें पूरे देश से आईं।

Supreme Court भी सक्रिय

यह मामला Supreme Court तक पहुंच गया। OSM विवाद और NEET-UG 2026 रद्द होने की घटनाएं मिलकर भारत की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल उठा रही हैं।


Coempt को penalty — लेकिन नुकसान हो चुका था

CBSE ने Coempt Edu Teck पर financial penalty लगाने की घोषणा की। Contract में यह प्रावधान था कि security breach, data leak और data faults के लिए penalty देनी होगी।

लेकिन सवाल यह है — penalty से क्या वे बच्चे वापस मिलेंगे जिनकी पढ़ाई का एक साल दांव पर लगा है?


क्या-क्या गलत हुआ? — एक नजर में

समस्याविवरण
कमजोर vendorCoempt का तेलंगाना में दो बार fail होने का रिकॉर्ड था
संदिग्ध टेंडर प्रक्रियानियम बदलकर Coempt को फायदा दिया गया
शिक्षकों की training नहींअधिकांश शिक्षकों को proper training नहीं मिली
खराब scanningधुंधली, गायब, गलत उत्तरपुस्तिकाएं
Security खामियांCERT-In को फरवरी में बताया, मई तक fix नहीं हुईं
Verification बंदबच्चे अपने नंबर चेक भी नहीं करा सकते थे
पोर्टल क्रैशमूल्यांकन के दौरान पोर्टल बार-बार बंद
देर से जवाबCBSE ने बहुत देर से स्वीकार किया

यह सिर्फ CBSE की नहीं, सिस्टम की विफलता है

यह विवाद सिर्फ एक खराब सॉफ्टवेयर की कहानी नहीं है। यह उस सोच की विफलता है जिसमें:

  1. बिना pilot testing के देशव्यापी सिस्टम लागू कर दिया गया।
  2. शिक्षकों की चेतावनियां सुनी नहीं गईं।
  3. सुरक्षा खामियां महीनों तक नजरअंदाज रहीं।
  4. एक dubious track record वाली कंपनी को करोड़ों बच्चों की जिम्मेदारी दे दी गई।
  5. बच्चों के हाथ से verification का अधिकार छीन लिया गया।

जैसा कि एक विश्लेषक ने कहा — “भारत में शिक्षा सुधार की एक अजीब परंपरा है — घोषणा बड़े जोश से होती है, लागू जल्दबाजी में होता है, और जब गड़बड़ी होती है तो चुप्पी साध ली जाती है।”


अब क्या होना चाहिए? — विशेषज्ञों की मांगें

विशेषज्ञों और छात्र संगठनों ने कुछ जरूरी मांगें रखी हैं:

  1. Free re-evaluation — जिन बच्चों को नुकसान हुआ, उनकी re-evaluation मुफ्त हो।
  2. Independent Technical Audit — पूरे OSM process की स्वतंत्र जांच और रिपोर्ट public हो।
  3. Accountability — सिर्फ vendor नहीं, उन officials की भी जवाबदेही जो शिक्षकों की चेतावनियां अनदेखा करते रहे।
  4. Marks verification बहाल — बच्चों का वह अधिकार लौटाया जाए जिससे वे अपने नंबर जांच सकें।
  5. Proper Pilot पहले — भविष्य में कोई भी system पहले छोटे स्तर पर test हो, training हो, security certification हो — तभी पूरे देश पर लागू हो।
  6. College admission deadlines से पहले — जिन बच्चों के नंबर सुधरने हैं, वे सुधार College admission deadlines से पहले हों।

नवीनतम स्थिति (जून 2026)

  • CBSE ने OSM portal की security कमजोरियां स्वीकार कीं।
  • IIT विशेषज्ञों और सरकारी cybersecurity agencies की टीम पोर्टल को ठीक करने में लगी है।
  • NSUI की PIL दिल्ली हाई कोर्ट में pending है।
  • Supreme Court भी मामले पर नजर रखे हुए है।
  • Coempt पर financial penalty लगाने की प्रक्रिया शुरू।
  • शिक्षा मंत्री ने वित्त मंत्री से मिलकर students की payment और re-evaluation issues पर चर्चा की।
  • CBSE ने ethical hackers को खामियां directly report करने का निमंत्रण दिया।

निष्कर्ष — बच्चों के साथ यह खिलवाड़ बंद होना चाहिए

OSM विवाद हमें एक बड़ा सबक देता है — तकनीक अपने आप में बुरी नहीं होती, लेकिन बिना तैयारी, बिना training, बिना testing और बिना जवाबदेही के लागू की गई तकनीक लाखों जिंदगियां तबाह कर सकती है।

Class 12 के नंबर सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं हैं। वे बच्चों के सालों की मेहनत, माँ-बाप की उम्मीदें, और एक पूरे परिवार के सपने होते हैं।

CBSE को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई भी “डिजिटल सुधार” पहले जमीनी स्तर पर ठीक से परखा जाए — ताकि एक और पीढ़ी इस तरह की लापरवाही का शिकार न बने।


यह ब्लॉग पोस्ट पूरी तरह से public domain में उपलब्ध news reports और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। जानकारी जून 2026 तक की है।

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